बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
सूरह अस-साफ़्फ़ात में एक ऐसा प्रभावशाली Jannat Aur Jahannam Ka Manzar बयान हुआ है, जहाँ एक तरफ़ जहन्नम में पहुँचने वाले लोगों की हालत, उनकी बातचीत और उनका पछतावा सामने आता है, तो दूसरी तरफ़ जन्नत में ईमान वालों की नेमतें, उनका सुकून और उनकी खुशी दिखाई जाती है। यह मंज़र इंसान को अपने अंजाम पर सोचने पर मजबूर कर देता है।
![]() |
| Jahannam ka Azaab aur Jannat ki neamaten |
क़ुरआन मजीद में अल्लाह तआला ने जन्नत और जहन्नम का ज़िक्र केवल भविष्य की कोई अनजानी बात बताने के लिए नहीं किया, बल्कि इंसान को अपने आज के कर्मों और कल के अंजाम पर विचार करने के लिए किया है।
इन आयतों को पढ़ते हुए इंसान अपने आप से सवाल कर सकता है:
मैं किस रास्ते पर चल रहा हूँ?
मेरे आज के कर्म मुझे किस अंजाम की तरफ़ ले जा रहे हैं?
क्या मैं अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा कर रहा हूँ?
इस आर्टिकल "Jannat Aur Jahannam Ka Manzar" में हम क़ियामत के दिन जन्नतियों और जहन्नमियों की आपसी बात चीत को और उनके अंजाम से मुतल्लिक़ पढ़ेंगे।
क़ुरआन का वह मंज़र जो इंसान को अपने अंजाम पर सोचने पर मजबूर कर देता है
इंसान इस दुनिया में कुछ वर्षों के लिए आया है। यहाँ उसे दौलत, घर, परिवार, कारोबार, शोहरत और अपनी इच्छाओं में ऐसा उलझ जाना आसान है कि उसे अपनी असली मंज़िल—आख़िरत—भूल जाती है।
लेकिन कुरआन बार-बार इंसान को याद दिलाता है कि यह दुनिया हमेशा रहने की जगह नहीं है। एक दिन सबको अपने रब के सामने खड़ा होना है और अपने कर्मों का हिसाब देना है।
सूरह अस-साफ्फ़ात में अल्लाह तआला ने क़ियामत, जहन्नम और जन्नत के ऐसे दिल को छू लेने वाले दृश्य बयान किए हैं कि इंसान अगर उन्हें समझकर पढ़े तो उसका दिल अपने कर्मों की ओर लौटने लगता है।
इस सूरह में एक तरफ जहन्नम का भयावह अंजाम है और दूसरी तरफ अल्लाह के मुख़लिस बंदों के लिए जन्नत की नेमतें हैं। विशेष रूप से जन्नत वालों के बीच होने वाली बातचीत और दुनिया के एक साथी को जहन्नम में देखने का दृश्य अत्यंत शिक्षाप्रद है।
क़ियामत का वह दिन जब ज़ालिमों को इकट्ठा किया जाएगा
सूरह अस-साफ्फ़ात में अल्लाह तआला फरमाता है:
“जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है, उन्हें और उनके साथियों को तथा जिन्हें वे अल्लाह के अलावा पूजा करते थे, सबको इकट्ठा करो।”
(सूरह अस-साफ्फ़ात 37:22)
सोचिए!
दुनिया में इंसान अपने साथियों, दोस्तों और हमख़याल लोगों के साथ कितना मजबूत महसूस करता है। कभी गलत काम में दोस्त साथ देते हैं, कभी परिवार का दबाव इंसान को गुनाह पर बनाए रखता है और कभी इंसान सिर्फ इसलिए सही रास्ता छोड़ देता है कि उसके आसपास के लोग भी वही कर रहे हैं।
लेकिन क़ियामत के दिन यही साथ किस काम आएगा?
वहाँ हर व्यक्ति को अपने कर्मों का सामना करना होगा।
कुरआन के इस दृश्य में उन लोगों को उनके साथियों और उन चीज़ों के साथ इकट्ठा करने का आदेश दिया जाता है जिनकी वे अल्लाह के अलावा इबादत करते थे।
जहन्नम की ओर ले जाने का भयानक मंज़र
इसके बाद उन्हें जहन्नम के रास्ते की ओर ले जाने का वर्णन आता है और उन्हें रोककर सवाल किया जाएगा।
अल्लाह फरमाता है:
“उन्हें रोक लो, उनसे पूछताछ की जानी है।”
(सूरह अस-साफ्फ़ात 37:24)
और फिर एक बेहद दर्दनाक सवाल:
“तुम्हें क्या हुआ कि तुम एक-दूसरे की मदद नहीं करते?”
(सूरह अस-साफ्फ़ात 37:25)
दुनिया में इंसान अपने दोस्तों पर भरोसा करता है।
- "मेरा दोस्त मेरे साथ है।”
- “मेरे रिश्तेदार मुझे बचा लेंगे।”
- “हम सब एक साथ हैं।”
लेकिन उस दिन वे एक-दूसरे की मदद नहीं कर सकेंगे। बल्कि वे अपने अंजाम की तरफ़ ले जाए जाएँगे।
कुरआन बताता है कि उस दिन वे पूरी तरह बेबस और अधीन होंगे।
आज का सबक
अगर कोई दोस्त हमें नमाज़ से दूर करता है, गुनाह की ओर ले जाता है, हराम को सामान्य बनाता है या आख़िरत का मज़ाक उड़ाता है तो हमें सोचना चाहिए कि वह दोस्ती हमें कहाँ ले जा रही है।
क्योंकि हर दोस्ती क़ियामत तक नहीं जाती।
यह मंज़र इंसान को याद दिलाता है कि दुनिया में चाहे कोई कितना ही ताक़तवर हो, क़यामत के दिन अल्लाह के सामने हर इंसान को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा।
अब जन्नत का दरवाज़ा खुलता है
जहन्नम के ख़ौफ़नाक मंज़र के बाद कुरआन अचानक हमें एक बिल्कुल अलग दुनिया में ले जाता है।
जहां जन्नत के नेमतों और ख़ूबसूरत मंज़र का जिक्र होता है।
अल्लाह के नेक बंदों के लिए जन्नत की नेमतें
जहन्नम के मंज़र के बाद अल्लाह तआला जन्नत वालों की नेमतों का ज़िक्र करता है।कल्पना कीजिए—एक ऐसी जगह जहाँ अल्लाह के नेक बंदे सम्मान के साथ बैठे हैं।
फ़रमाया गया:
“लेकिन अल्लाह के चुने हुए बंदे (ऐसे नहीं होंगे)।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:40)
और फिर:
उनके लिए जानी बुझी रोज़ी है।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:41)
“फल हैं, और वे सम्मानित किए जाएँगे।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:42)
“नेमतों वाली जन्नतों में, एक-दूसरे के सामने।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:43–44
यह जन्नत का ऐसा मंज़र है जहाँ अल्लाह के नेक बंदे सम्मान, सुकून और नेमतों में होंगे।
जन्नत में साफ़ पानी का प्याला
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“उनके चारों ओर एक प्याला घुमाया जाएगा, जिसमें साफ़-सुथरा पेय होगा।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:45)
और आगे बताया गया है कि वह पीने वालों के लिए आनंददायक होगा और उसमें कोई नशा नहीं होगा।
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:46–47)
यहाँ क़ुरआन जन्नत की नेमतों का ज़िक्र करते हुए बताता है कि वहाँ की चीज़ें दुनिया की चीज़ों जैसी नहीं होंगी।
जन्नत वालों का सुकून और सम्मान
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“और उनके पास ऐसी निगाहें नीची रखने वाली पत्नियाँ होंगी, बड़ी-बड़ी आँखों वाली।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:48)
और आगे:
“मानो वे छिपाए हुए अंडे हों।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:49)
यह आयत जन्नत की पवित्रता, सुंदरता और सम्मान का बयान करती है।
लेकिन जन्नत की असली खुशी केवल उसकी सुंदरता नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा, सुरक्षा और हमेशा रहने वाली नेमतें हैं।
जन्नत वालों की खुशी और आपस में बातचीत
सूरह अस-साफ़्फ़ात में जन्नत वालों की बातचीत का भी ज़िक्र है।
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“वे एक-दूसरे की ओर मुड़कर आपस में सवाल करेंगे।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:50)
फिर एक व्यक्ति अपने साथी का ज़िक्र करता है और बताता है कि वह उसे आख़िरत से रोकता था।
यह मंज़र हमें याद दिलाता है कि अच्छे साथी इंसान को नेक रास्ते पर ले जा सकते हैं, और बुरे साथी उसे गुमराही की तरफ़ धकेल सकते हैं।
इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपने दोस्तों और संगत के बारे में सोचे।
अच्छे और बुरे साथी का असर
यह सूरह का सबसे भावुक और सोचने पर मजबूर करने वाला दृश्य है।
उनमें से एक कहेगा:
“मेरे एक साथी हुआ करते थे।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:51)
वह बताएगा कि उसका साथी उससे कहा करता था:
“क्या तुम भी उन लोगों में से हो जो (आख़िरत को) सच मानते हैं?”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:52)
और वह साथी दुनिया में आख़िरत का मज़ाक उड़ाता था। वह कहता था:
“क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ हो जाएँगे, तब क्या हमें बदला दिया जाएगा?”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:53)
यहाँ क़ुरआन हमें उस सोच का अंजाम दिखाता है जिसमें इंसान मौत के बाद की ज़िंदगी को झुठलाता है और दुनिया की ज़िंदगी को ही सब कुछ समझ लेता है।
👉 Shirk kyun Gumrahi aur aakhirat ki Tabahi ka sabab hai zarur padhen ise
जन्नत वाला अपने जहन्नमी साथी को देखना चाहेगा
अब वह जन्नत वाला कहेगा:
“क्या तुम झाँककर उसे देखना चाहते हो?”
(37:54)
फिर वह देखेगा...
और उसका वही पुराना साथी जहन्नम के बीच में होगा।
(37:55)
यह दृश्य कितना भयावह होगा!
दुनिया में वही व्यक्ति शायद उसका मज़ाक उड़ाता था।
शायद कहता था:
- “आख़िरत-वाख़िरत कुछ नहीं है।”
- “अभी जिंदगी का मज़ा लो।”
- “मरने के बाद कौन देखता है?”
लेकिन अब हक़ीक़त उसके सामने होगी।
जन्नत वाला अपने साथी को जहन्नम में देखेगा
इसके बाद जन्नत में रहने वाला व्यक्ति अपने साथी को देखेगा और कहेगा:
“अल्लाह की क़सम! तुम तो मुझे लगभग तबाह ही कर देने वाले थे।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:56)
फिर वह कहेगा:
“और अगर मेरे रब की नेमत न होती, तो मैं भी पकड़े गए लोगों में से होता।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:57)
यह आयत इंसान को बहुत बड़ी सीख देती है:
जन्नत में पहुँचना केवल अपने कर्मों पर घमंड करने का कारण नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत और नेमत का शुक्र अदा करने का अवसर है।
इसके बाद वह कहेगा:
“क्या हम मरने वाले नहीं हैं, सिवाय हमारी पहली मौत के, और हम अज़ाब दिए जाने वाले नहीं हैं?”(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:58–59)
यह जन्नत वालों की खुशी और उनके सुकून का बयान है।
जन्नत की नेमतें: असली कामयाबी क्या है?
इसके बाद अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“निश्चय ही यह बहुत बड़ी कामयाबी है।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:60)
और फिर:
“ऐसी ही कामयाबी के लिए कर्म करने वालों को कर्म करना चाहिए।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:61)
यह आयत इस पूरे मंज़र का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है।
दुनिया में इंसान धन, मकान, कारोबार, शोहरत और दूसरी चीज़ों को कामयाबी समझता है। लेकिन क़ुरआन बताता है कि असली कामयाबी आख़िरत की कामयाबी है।
इसलिए इंसान को अपने जीवन का उद्देश्य केवल दुनिया की तरक्की नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा और आख़िरत की कामयाबी बनाना चाहिए।
जहन्नम का एक भयानक मंज़र: ज़क़्क़ूम का पेड़
सूरह अस-साफ़्फ़ात में जहन्नम के अज़ाब का एक और मंज़र बयान हुआ है।अल्लाह तआला ज़क्कूम के पेड़ का उल्लेख करता है।
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“क्या यह मेहमाननवाज़ी अच्छी है या ज़क़्क़ूम का पेड़?”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:62)
फिर फ़रमाया:
“निश्चय ही हमने उसे ज़ालिमों के लिए एक परीक्षा बनाया है।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:63)
और आगे बताया गया है कि वह पेड़ जहन्नम की तह से निकलता है और उसके फल ऐसे हैं जैसे शैतानों के सिर।
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:64–65)
यह मंज़र इंसान को जहन्नम के अज़ाब से डराता है और बताता है कि आख़िरत की नेमतें और अज़ाब दुनिया की चीज़ों जैसे नहीं हैं।
फ़िर फ़रमाया गया:
जहन्नम वाले उससे खाएँगे और अपने पेट भरेंगे। उसके बाद उनके लिए खौलता हुआ पानी होगा और फिर उनका लौटना जहन्नम की ओर होगा। (सूरह अस-साफ्फ़ात 37:62-68)
यह दृश्य इंसान को यह समझाने के लिए काफी है कि जहन्नम कोई मामूली मामला नहीं है। यानी एक तरफ जन्नत की मेहमाननवाज़ी है और दूसरी तरफ जहन्नम का अंजाम।
अब फैसला इंसान को करना है कि वह किस रास्ते पर चल रहा है।
👉 Qiyamat ke Din Koi bhi kisi ke kaam nahi aayega Aakhir Kyun? Padhen Yahan
जहन्नमियों का खाना और पीना भी अज़ाब होगा
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“फिर वे उसी में से खाएँगे और उसी से अपने पेट भरेंगे।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:66)
इसके बाद बताया गया है कि उनके लिए गर्म पानी का मिश्रण होगा।
“फिर उसके ऊपर उनके लिए खौलते हुए पानी का मिश्रण होगा।”
(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:67)
यह मंज़र हमें याद दिलाता है कि जहन्नम में इंसान की कोई इच्छा पूरी होने पर भी उसे सुकून नहीं मिलेगा। वहाँ का खाना और पीना भी अज़ाब का हिस्सा होगा।
दुनिया में गुमराह करने वाले लोगों का अंजाम
सूरह अस-साफ्फ़ात में आगे जहन्नम वालों की हालत और उनके अंजाम का
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“निश्चय ही उन्होंने अपने बाप-दादाओं को गुमराह पाया, तो वे उन्हीं के पदचिह्नों पर दौड़ते चले गए।”(सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:69–70)
यह आयत हमें सिखाती है कि केवल यह कहना कि “हमारे बाप-दादा ऐसा करते थे” किसी गलत काम को सही नहीं बना देता।
यहाँ एक बहुत बड़ा सबक है:
सिर्फ इसलिए कि कोई काम हमारे घर, समाज या खानदान में लंबे समय से होता आया है, वह सही नहीं हो जाता। सही और गलत का फैसला कुरआन और सुन्नत की रोशनी में होना चाहिए।
मुसलमान को चाहिए कि वह क़ुरआन और सही सुन्नत की रोशनी में अपने अक़ीदे और अमल की जाँच करे।
जन्नत की यह तस्वीर हमें क्या सिखाती है?
ध्यान दीजिए—कुरआन सिर्फ यह नहीं कहता कि जन्नत सुंदर है।
वह हमें एक मक़सद देता है।
अल्लाह कहता है:
“ऐसी सफलता के लिए ही कर्म करने वालों को कर्म करना चाहिए।”
इसका मतलब यह है कि हमारी मेहनत का सबसे बड़ा लक्ष्य सिर्फ दुनिया की कामयाबी नहीं होना चाहिए।
- दुनिया की नौकरी मिले—अच्छी बात है।
- व्यापार बढ़े—अच्छी बात है।
- घर बने—अच्छी बात है।
- औलाद कामयाब हो—अच्छी बात है।
लेकिन असली सवाल यह है:
क्या हम उस बड़ी सफलता के लिए भी तैयारी कर रहे हैं?
सूरह अस-साफ्फ़ात का सबसे बड़ा संदेश — फैसला आज करना है
क़ियामत के दिन पछताने से पहले आज अपने रास्ते को देखना चाहिए।
आज हमारे पास:
- तौबा का मौका है।
- नमाज़ का मौका है।
- कुरआन पढ़ने का मौका है।
- सदक़ा करने का मौका है।
- माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने का मौका है।
- गुनाह छोड़ने का मौका है।
- गलत संगत छोड़ने का मौका है।
- अल्लाह की ओर लौटने का मौका है।
लेकिन मौत आने के बाद अमल का दरवाज़ा बंद हो जाएगा।
इसलिए बुद्धिमान वह है जो क़ियामत के दृश्य को सिर्फ पढ़कर आगे न बढ़ जाए, बल्कि अपने जीवन में बदलाव लाए।
आज अपने दोस्तों के बारे में भी सोचिए
सूरह अस-साफ्फ़ात का जन्नत और जहन्नम वाला बयान हमें दोस्ती के बारे में भी बहुत बड़ी सीख देता है।
वही दोस्त दोबारा सामने आया—
एक जन्नत में और दूसरा जहन्नम में।
एक के लिए कहा गया:
“यही बड़ी सफलता है।”
और दूसरा जहन्नम के बीच में दिखाई दिया।
इसलिए हमें अपने आप से पूछना चाहिए:
- मेरी संगत मुझे किस तरफ ले जा रही है?
- क्या मेरे दोस्त मुझे नमाज़ की याद दिलाते हैं?
- क्या वे मुझे अल्लाह की याद दिलाते हैं?
- क्या वे गुनाह से रोकते हैं?
- क्या वे आख़िरत की तैयारी करवाते हैं?
- या फिर मेरी संगत मुझे धीरे-धीरे अल्लाह से दूर कर रही है?
Conclusion:
सूरह अस-साफ्फ़ात में Jannat Aur Jahannam Ka Manzar का बयान केवल भविष्य की कोई कहानी नहीं है।
यह आज हमारे लिए चेतावनी और मार्गदर्शन है।
जहन्नम का दृश्य हमें डराता है ताकि हम गुनाह से बचें।
जन्नत का दृश्य हमें उम्मीद देता है ताकि हम नेक अमल की ओर बढ़ें।
जहन्नम वालों की बेबसी हमें बताती है कि गलत रास्ते पर चलने के लिए दूसरों की नकल करना कोई बहाना नहीं होगा।
और जन्नत वालों की बातचीत हमें यह सिखाती है कि असली सफलता दुनिया की दौलत, शोहरत और आराम नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ामंदी और जन्नत है।
इसलिए आज ही अपने आप से पूछें:
मैं किस रास्ते पर जा रहा हूँ?
और अगर रास्ता गलत है तो देर होने से पहले अपने रब की ओर लौट आइए।
इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन का जायज़ा लें:
- क्या हम नमाज़ की पाबंदी करते हैं?
- क्या हम अल्लाह की आज्ञाओं का पालन करते हैं?
- क्या हम अपने माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं?
- क्या हम लोगों के अधिकार अदा करते हैं?
- क्या हम अपने दोस्तों और संगत के बारे में सावधान हैं?
- क्या हम आख़िरत की तैयारी कर रहे हैं?
अल्लाह तआला
🤲 अल्लाह हमें सही रास्ते पर चलने, कुरआन को समझने, नेक अमल करने और जन्नतुल-फ़िरदौस हासिल करने वालों में शामिल फरमाए। और हमें ईमान, नेक अमल और अपनी रहमत के साथ जन्नत में दाख़िल होने वालों में शामिल फ़रमाए।आमीन।
कुरआनी ख़ास हवाले:
सूरह अस-साफ्फ़ात 37:22-26 — ज़ालिमों को इकट्ठा करना और क़ियामत का दृश्य।- 37:37-40 — अज़ाब और अल्लाह के मुख़लिस बंदों की बात चीत।
- 37:41-49 — जन्नत की नेमतें और जन्नत वालों के हालात।
- 37:50-61 — जन्नत वालों की आपसी बातचीत और दुनिया के साथी को जहन्नम में देखना।
- 37:62-68 — ज़क्कूम और जहन्नम का अंजाम।
- 37:69-74 — बाप दादा की गुमराही का पैरवी और उससे बचने वालों का बयान।
अल्लाह की किताब को केवल पढ़ने वाली किताब नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी बदलने वाली किताब बनाइए।
FAQs –
1. Surah As-Saffaat mein Jannat ka kya manzar bayan kiya gaya hai?
Surah As-Saffaat mein Jannat walon ke liye izzat, rizq, phal, ne‘matein aur aamne-saamne takhton par baithne ka zikr hai. Unke liye paak aur lazeez mashroob bhi hoga. (Surah As-Saffaat 37:40-49)
2. Surah As-Saffaat mein Jahannam ka kya manzar bayan hua hai?
Is Surah mein Jahannam ke azaab, Zaqqum ke darakht aur Jahannam walon ke liye khaulta hua mashroob ka zikr kiya gaya hai. (37:62-68)
3. Jannat walon ki aapas mein kya baat-cheet hogi?
Jannat wale ek-doosre ki taraf rukh karke duniya ki apni purani zindagi ke baare mein baat karenge. Unmein se ek apne purane saathi ka zikr karega. (37:50-53)
4. Jannat wala apne purane saathi ko kahan dekhega?
Qur’an ke mutabiq, woh apne purane saathi ko dekhega aur use Jahannam ke beech mein payega. (37:54-55)
5. Us Jannati shakhs ka Jahannami saathi duniya mein kya kehta tha?
Woh shakhs dobara zinda kiye jaane aur Aakhirat ke hisaab par hairani ka izhar karta tha aur poochta tha ki kya maut ke baad mitti aur haddiyan ban jaane ke baad bhi humein jaza milegi. (37:51-53)
6. Jannat wala apne Jahannami saathi ko dekhkar kya kahega?
Woh Allah ki qasam kha kar kahega ki tum mujhe bhi tabah karne ke qareeb pahucha diye the. Phir woh Allah ki ne‘mat ka shukr karega ki woh Jahannam mein pahunchne walon mein shamil nahi hua. (37:56-57)
7. Surah As-Saffaat mein “Yahi badi kamyabi hai” kis mauke par kaha gaya hai?
Jannat wala jab apne anjaam ko dekhega aur Allah ki ne‘mat ko yaad karega, to kaha jayega: “Beshak yahi bahut badi kamyabi hai.” (37:60)
8. “Aisi kamyabi ke liye amal karne walon ko amal karna chahiye” kis Surah mein hai?
Yeh paigham Surah As-Saffaat, Ayat 61 mein hai. Isse maloom hota hai ki asal kamyabi Aakhirat ki kamyabi hai aur uske liye nek amal karna chahiye.
9. Surah As-Saffaat mein Zaqqum kya hai?
Zaqqum Jahannam mein ek darakht ka zikr hai jiske phal Jahannam walon ke liye azaab ka hissa honge. (37:62-66)
10. Surah As-Saffaat ka Jannat aur Jahannam ke manazir se kya islahi paigham milta hai?
Isse insaan ko Aakhirat ki haqeeqat yaad rakhne, ghalat aqeede aur bure a‘maal se bachne, nek amal karne aur Allah ki taraf rujoo karne ki naseehat milti hai.
11. Kya duniya ki dosti Aakhirat mein bhi kaam aayegi?
Surah As-Saffaat ka Jannat aur Jahannam wala waqia batata hai ki duniya mein kisi ki pairvi karna Aakhirat mein uske liye nuqsan ka sabab ban sakta hai. Isliye insaan ko haq ko pehchan kar uski pairvi karni chahiye. (37:50-61)
12. Surah As-Saffaat humein sabse badi kamyabi ke baare mein kya sikhati hai?
Surah ke mutabiq badi kamyabi Jannat ki ne‘mat hasil karna aur Jahannam ke azaab se bachna hai. Isi liye Allah farmata hai: “Aisi kamyabi ke liye hi amal karne walon ko amal karna chahiye.” (37:60-61)

0 Comments